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बिहार में विधायक को हर साल कितना MLA Nidhi Fund मिलता है और किस नियम के तहत
बहुत से लोग यह जानना चाहते हैं कि उनके क्षेत्र के विधायक को सरकार से कितना पैसा मिलता है, क्योंकि अक्सर सड़क, नाली, स्कूल, सामुदायिक भवन जैसे काम अधूरे रह जाते हैं। लोगों को लगता है कि “फंड नहीं आया”, जबकि असल में फंड हर साल जारी होता है।
बिहार सरकार हर विधायक को मुख्यमंत्री क्षेत्र विकास योजना (MLA Local Area Development Fund) के तहत लगभग ₹3 करोड़ प्रति वर्ष तक की राशि देती है। यह पैसा सीधे विधायक के हाथ में नहीं दिया जाता, बल्कि जिला प्रशासन के माध्यम से खर्च कराया जाता है।
यह राशि इन नियमों के तहत जारी होती है:
- योजना एवं विकास विभाग, बिहार सरकार द्वारा नियंत्रित
- जिला पदाधिकारी (DM) कार्यान्वयन एजेंसी
- विधायक सिर्फ कार्य की सिफारिश करता है
- पैसा सरकारी विभाग/एजेंसी द्वारा खर्च होता है
मतलब साफ है — विधायक पैसा खुद नहीं रखता, बल्कि काम सुझाता है। इसलिए अगर काम नहीं हुआ, तो जिम्मेदारी तय की जा सकती है।
अगर आपके क्षेत्र में सालों से कोई काम नहीं हुआ, तो यह पूछना आपका अधिकार है कि:
- इस साल कितना फंड आया?
- कितना खर्च हुआ?
- कहाँ खर्च हुआ?
यहीं से पारदर्शिता शुरू होती है।
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MLA Fund का पैसा किन-किन कामों पर खर्च किया जा सकता है और किन पर नहीं
अक्सर लोग सोचते हैं कि विधायक किसी भी काम में पैसा लगा सकता है, लेकिन ऐसा नहीं है। सरकार ने स्पष्ट नियम और सीमाएँ तय की हैं कि पैसा केवल सार्वजनिक कार्यों में ही खर्च होगा।
जिन कामों पर खर्च किया जा सकता है:
- सड़क, गली, नाली निर्माण
- स्कूल भवन, शौचालय, फर्नीचर
- सामुदायिक भवन, पंचायत भवन
- हैंडपंप, पानी की टंकी
- स्ट्रीट लाइट
- अस्पताल/आंगनवाड़ी सुधार
- सार्वजनिक पार्क या श्मशान घाट विकास
ये सभी जनहित के स्थायी (permanent) काम होने चाहिए।
जिन कामों पर खर्च नहीं किया जा सकता:
- निजी व्यक्ति के घर या जमीन पर काम
- किसी निजी संस्था या क्लब को पैसा देना
- वेतन या निजी खर्च
- धार्मिक/व्यक्तिगत आयोजन
- वाहन या लग्जरी सामान खरीद
अगर विधायक इन नियमों के खिलाफ पैसा खर्च करता है, तो यह फंड का दुरुपयोग (misuse) माना जाएगा।
इसलिए जब भी आप अपने इलाके में काम देखें, खुद से पूछें:
- क्या यह सार्वजनिक काम है?
- क्या यह सबके उपयोग में आएगा?
- क्या यह नियमों के अनुसार है?
अगर जवाब “नहीं” है, तो मामला संदिग्ध हो सकता है।
अपने क्षेत्र में MLA Fund कहाँ खर्च हुआ है यह ऑनलाइन या RTI से कैसे चेक करें
यही सबसे बड़ा सवाल है — “पैसा आया तो गया कहाँ?”
अच्छी बात यह है कि यह जानकारी छुपी नहीं है। आप खुद घर बैठे चेक कर सकते हैं।
तरीका 1: ऑनलाइन चेक करें
कुछ जिलों में जानकारी वेबसाइट पर उपलब्ध होती है:
- जिला प्रशासन की आधिकारिक वेबसाइट
- योजना एवं विकास विभाग पोर्टल
- “MLA Fund Utilization” या “Scheme Details” सेक्शन
यहाँ आपको मिल सकता है:
- स्वीकृत कार्यों की सूची
- लागत राशि
- काम की स्थिति (पूरा/अधूरा)
- एजेंसी का नाम
लेकिन कई बार वेबसाइट अपडेट नहीं होती या अधूरी जानकारी होती है।
तरीका 2: RTI से पक्की जानकारी लें (सबसे भरोसेमंद तरीका)
अगर ऑनलाइन जानकारी नहीं मिले, तो RTI सबसे मजबूत कानूनी रास्ता है। RTI के माध्यम से विभाग लिखित में जवाब देने के लिए बाध्य होता है।
आप यह जानकारी मांग सकते हैं:
- पिछले 5 वर्षों का कुल MLA Fund
- स्वीकृत कार्यों की सूची
- प्रत्येक कार्य की लागत
- टेंडर/ठेकेदार का नाम
- भुगतान की कॉपी
- कार्य पूर्णता रिपोर्ट
RTI का फायदा यह है कि:
- सरकारी रिकॉर्ड की प्रमाणित कॉपी मिलती है
- जवाब देना विभाग के लिए अनिवार्य है
- भ्रष्टाचार उजागर हो सकता है
अगर ड्राफ्ट बनाने या सही विभाग खोजने में परेशानी हो, तो RTIwala जैसी सेवा पूरी प्रक्रिया सरल बना सकती है — सही PIO ढूंढना, आवेदन बनाना और फॉलो-अप करना।
इससे आपको अंदाज़ा नहीं, बल्कि लिखित सबूत मिलता है।
MLA Fund में गड़बड़ी, भ्रष्टाचार या अधूरे काम की शिकायत कैसे करें
कई बार आप देखते हैं कि कागजों में सड़क बन गई, लेकिन जमीन पर गड्ढे ही गड्ढे हैं।
या काम आधा हुआ और बोर्ड लगा दिया “कार्य पूर्ण”।
यही असली समस्या है — फंड खर्च दिखता है, काम नहीं दिखता।
ऐसी स्थिति में चुप रहना सही नहीं है। आप सीधे शिकायत कर सकते हैं।
सबसे पहले सबूत इकट्ठा करें:
- काम की फोटो/वीडियो
- लोकेशन
- बोर्ड/टेंडर की जानकारी
- लोगों का बयान
- अगर मिले तो खर्च की जानकारी
शिकायत कहाँ करें:
- जिला पदाधिकारी (DM) कार्यालय
- जिला योजना पदाधिकारी
- संबंधित विभाग (PWD / ग्रामीण कार्य / पंचायत विभाग)
- मुख्यमंत्री जन शिकायत पोर्टल
- लोक शिकायत निवारण अधिकार अधिनियम (RTPS/PGRO)
शिकायत लिखते समय साफ लिखें:
- कार्य का नाम
- स्थान
- अनुमानित लागत
- क्या गड़बड़ी दिख रही है
- जांच की मांग
अगर मामला गंभीर है, तो लिखित शिकायत + RTI दोनों साथ में करना ज्यादा असरदार रहता है। इससे अधिकारी टाल नहीं सकते।
याद रखें — सरकारी पैसा जनता का है, इसलिए सवाल पूछना आपका अधिकार है।
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MLA Nidhi Fund की पूरी जानकारी पाने के लिए RTI आवेदन कैसे फाइल करें (Step-by-Step)
अगर आपको सच्चाई जाननी है, तो RTI सबसे मजबूत हथियार है।
RTI के जरिए विभाग को लिखित और प्रमाणित जवाब देना ही पड़ता है, बहाना नहीं चलता।
RTI लगाने की प्रक्रिया बहुत आसान है।
Step 1: सही विभाग पहचानें
आमतौर पर जानकारी यहाँ मिलेगी:
- जिला योजना कार्यालय
- जिला पदाधिकारी (DM Office)
- योजना एवं विकास विभाग
यहीं के PIO (Public Information Officer) को आवेदन भेजें।
Step 2: क्या जानकारी मांगें
स्पष्ट और पॉइंट में लिखें:
- पिछले 5 साल का MLA Fund आवंटन
- स्वीकृत कार्यों की सूची
- कार्यवार खर्च राशि
- ठेकेदार/एजेंसी का नाम
- भुगतान की कॉपी
- कार्य पूर्णता प्रमाण पत्र
- निरीक्षण रिपोर्ट
ध्यान रखें — सवाल नहीं, सूचना/दस्तावेज मांगें।
Step 3: आवेदन जमा करें
- ₹10 पोस्टल ऑर्डर या कोर्ट फीस
- डाक से या ऑनलाइन (अगर सुविधा हो)
- 30 दिन में जवाब अनिवार्य
अगर जवाब नहीं मिला या अधूरा मिला:
- First Appeal करें
- फिर Second Appeal
यही प्रक्रिया अधिकारियों को जवाबदेह बनाती है।
अगर आपको ड्राफ्ट लिखने, सही PIO ढूंढने या फॉलो-अप करने में दिक्कत आती है, तो RTIwala पूरी प्रक्रिया संभालता है — आवेदन से लेकर जवाब मिलने तक, जिससे समय और मेहनत दोनों बचते हैं।
आम जनता के लिए MLA Fund पारदर्शिता क्यों जरूरी है और आपके अधिकार क्या हैं
MLA Fund सिर्फ कागजों की योजना नहीं है।
यह आपके टैक्स का पैसा है, जो आपके ही इलाके के विकास के लिए दिया जाता है।
अगर जनता सवाल नहीं पूछेगी, तो:
- फर्जी काम दिखाए जाएंगे
- पैसा गलत जगह खर्च होगा
- अधूरे प्रोजेक्ट पड़े रहेंगे
- भ्रष्टाचार बढ़ेगा
लेकिन जब लोग RTI लगाते हैं, शिकायत करते हैं, जानकारी मांगते हैं — तब अधिकारी सावधान हो जाते हैं।
आपके कानूनी अधिकार:
- फंड की पूरी जानकारी मांगना
- खर्च का रिकॉर्ड देखना
- दस्तावेज की कॉपी लेना
- शिकायत दर्ज करना
- जांच की मांग करना
- RTI और अपील करना
मतलब साफ है — आप सिर्फ वोटर नहीं, निगरानी करने वाले नागरिक भी हैं।
जब लोग जागरूक होते हैं, तभी:
- सड़कें सही बनती हैं
- स्कूल सुधरते हैं
- अस्पताल बेहतर होते हैं
- और नेता जवाबदेह बनते हैं
छोटा सा RTI आवेदन कई लाख रुपये की गड़बड़ी पकड़ सकता है।
अगर आपको अपने क्षेत्र में MLA Fund का सही हिसाब जानना है, तो इंतजार मत करें —
आधिकारिक जानकारी मांगें, सबूत जुटाएं, और जरूरत पड़े तो विशेषज्ञ मदद लें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
1. बिहार में एक विधायक को सालाना कितना MLA Nidhi Fund मिलता है?
बिहार सरकार हर विधायक को लगभग ₹3 करोड़ प्रति वर्ष तक का विकास फंड देती है। यह राशि जिला प्रशासन के माध्यम से सार्वजनिक विकास कार्यों पर खर्च की जाती है, विधायक को सीधे नकद नहीं दी जाती।
2. क्या विधायक इस फंड का पैसा अपने मन से कहीं भी खर्च कर सकता है?
नहीं। विधायक सिर्फ काम की सिफारिश करता है। खर्च जिला प्रशासन और संबंधित विभाग करते हैं। पैसा केवल सार्वजनिक कार्यों जैसे सड़क, स्कूल, नाली, पानी, लाइट आदि पर ही लगाया जा सकता है।
3. अपने क्षेत्र में MLA Fund कहाँ खर्च हुआ है, यह कैसे पता करें?
आप जिला प्रशासन की वेबसाइट चेक कर सकते हैं या RTI आवेदन देकर कार्यों की सूची, खर्च राशि, ठेकेदार का नाम और भुगतान रिकॉर्ड की जानकारी मांग सकते हैं। RTI से आपको प्रमाणित लिखित जवाब मिलता है।
4. अगर MLA Fund का काम अधूरा या घटिया गुणवत्ता का हो तो क्या करें?
सबसे पहले फोटो और सबूत इकट्ठा करें। फिर DM कार्यालय, संबंधित विभाग या जन शिकायत पोर्टल पर लिखित शिकायत दर्ज करें। साथ में RTI लगाकर खर्च का पूरा रिकॉर्ड मांगें ताकि जांच हो सके।
5. MLA Fund की जानकारी के लिए RTI में क्या-क्या पूछना चाहिए?
आप मांग सकते हैं:
- कुल फंड आवंटन
- स्वीकृत कार्यों की सूची
- कार्यवार खर्च राशि
- ठेकेदार/एजेंसी का नाम
- भुगतान की कॉपी
- कार्य पूर्णता रिपोर्ट
सवाल नहीं, सिर्फ दस्तावेज और रिकॉर्ड मांगें।
6. अगर RTI का जवाब न मिले तो क्या करें?
अगर 30 दिन में जवाब नहीं मिलता या अधूरा मिलता है, तो First Appeal करें। फिर भी समाधान न हो तो Second Appeal कर सकते हैं। कानून के अनुसार विभाग को जवाब देना अनिवार्य है।
7. क्या आम नागरिक MLA Fund की जांच या ऑडिट की मांग कर सकता है?
हाँ। हर नागरिक को सरकारी खर्च की जानकारी मांगने, रिकॉर्ड देखने, शिकायत करने और जांच की मांग करने का पूरा कानूनी अधिकार है। यह आपका संवैधानिक अधिकार है।
8. RTI आवेदन लिखने और सही विभाग खोजने में मदद कहाँ मिलेगी?
अगर प्रक्रिया समझ नहीं आ रही हो, तो RTIwala आवेदन ड्राफ्ट, सही PIO खोजने और फॉलो-अप में मदद करता है ताकि आपको बिना भागदौड़ के आधिकारिक जानकारी मिल सके।











































