1. बिहार पुलिस में ऑनलाइन आरटीआई आवेदन कैसे करें – पूरा तरीका
अगर आपने एफआईआर दर्ज कराई है लेकिन पुलिस केस की जानकारी नहीं दे रही, जांच की स्थिति नहीं बता रही या बार-बार चक्कर लगवाए जा रहे हैं, तो आप सूचना का अधिकार (RTI) लगाकर लिखित जानकारी ले सकते हैं। यह आपका कानूनी अधिकार है।
ऑनलाइन आरटीआई लगाने का फायदा यह है कि आपको कहीं जाने की जरूरत नहीं पड़ती। घर बैठे मोबाइल या कंप्यूटर से आवेदन कर सकते हैं और तुरंत रसीद भी मिल जाती है।
आरटीआई लगाने का आसान तरीका:
- https://rtionline.gov.in वेबसाइट खोलें
- “Submit Request” पर क्लिक करें
- राज्य में “Bihar” चुनें
- विभाग में “Home Department / Bihar Police” चुनें
- अपना नाम, पता, मोबाइल नंबर भरें
- जो जानकारी चाहिए, साफ-साफ लिखें
- फीस ऑनलाइन जमा करें
- आवेदन सबमिट करें और रजिस्ट्रेशन नंबर नोट कर लें
यह नंबर बहुत जरूरी होता है। इसी से आप बाद में अपने आवेदन की स्थिति देख सकते हैं। पुलिस विभाग को 30 दिनों के अंदर जवाब देना जरूरी होता है।
पुलिस FIR या केस की जानकारी नहीं दे रही? RTIwala आधिकारिक रिकॉर्ड दिलाए—अभी संपर्क करें:
📞 Call: +91-7999-50-6996
💬 WhatsApp: https://help.rti.link/
🌐 www.rtiwala.com
2. आधिकारिक पोर्टल, फीस और क्या-क्या जानकारी भरनी होती है
बहुत से लोगों को लगता है कि आरटीआई लगाने के लिए कागज या दस्तावेज देने पड़ेंगे, लेकिन ऑनलाइन आवेदन में ऐसा कुछ भी नहीं करना पड़ता। सिर्फ सही जानकारी भरनी होती है।
आपको सिर्फ अपनी बेसिक डिटेल और मांगी गई सूचना लिखनी होती है। ध्यान रखें कि पता और मोबाइल नंबर सही हो, क्योंकि जवाब उसी पर भेजा जाएगा।
क्या-क्या भरना जरूरी है:
- पूरा नाम
- पूरा पता
- मोबाइल नंबर
- ईमेल आईडी
- किस जानकारी की जरूरत है, उसका साफ विवरण
फीस की जानकारी:
- सामान्य शुल्क ₹10
- भुगतान ऑनलाइन (UPI, डेबिट कार्ड, नेट बैंकिंग आदि)
- बीपीएल परिवार के लोगों को फीस नहीं देनी पड़ती, लेकिन प्रमाण देना होता है
एक जरूरी बात याद रखें। आरटीआई में “क्यों” या “कैसे” जैसे सवाल नहीं पूछने चाहिए। आपको सिर्फ रिकॉर्ड या दस्तावेज मांगने चाहिए।
गलत तरीका: पुलिस ने कार्रवाई क्यों नहीं की?
सही तरीका: की गई कार्रवाई की रिपोर्ट की प्रमाणित प्रति दें।
सही तरीके से लिखने पर आपको पक्का जवाब मिलता है।
3. एफआईआर की स्थिति, केस की प्रगति और पुलिस रिकॉर्ड कैसे प्राप्त करें
अक्सर पुलिस स्टेशन जाने पर सिर्फ बोलकर जानकारी दी जाती है, लेकिन कोई लिखित सबूत नहीं मिलता। ऐसे में बाद में कुछ साबित करना मुश्किल हो जाता है। आरटीआई से आपको हर जानकारी लिखित और आधिकारिक रूप में मिलती है।
जब आप रिकॉर्ड मांगते हैं, तो पुलिस विभाग को कागज देना ही पड़ता है। इससे आपको असली और सही जानकारी मिलती है।
आप आरटीआई से ये जानकारी मांग सकते हैं:
- एफआईआर की प्रमाणित कॉपी
- केस में अब तक क्या कार्रवाई हुई, उसकी रिपोर्ट
- जांच किस अधिकारी के पास है, उसका नाम
- केस की प्रगति रिपोर्ट
- चार्जशीट दाखिल हुई या नहीं
- देरी का कारण रिकॉर्ड से बताएं
- केस बंद हुआ है तो उसकी रिपोर्ट
इन दस्तावेजों का फायदा यह है कि:
- आपके पास लिखित सबूत रहता है
- आप ऊपरी अधिकारियों को शिकायत कर सकते हैं
- कोर्ट या कानूनी कार्यवाही में उपयोग कर सकते हैं
- पुलिस जवाब देने के लिए मजबूर होती है
इस तरह आरटीआई लगाने से आपको इधर-उधर भटकना नहीं पड़ता और सीधे सही जानकारी मिलती है।
4. आरटीआई आवेदन कैसे लिखें और सही विभाग या अधिकारी कैसे चुनें
आरटीआई का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है आवेदन सही तरीके से लिखना। अगर आवेदन साफ और सीधा नहीं होगा, तो पुलिस विभाग जानकारी देने से मना कर सकता है या अधूरा जवाब दे सकता है। इसलिए आवेदन हमेशा सरल, छोटा और स्पष्ट होना चाहिए।
याद रखें, आरटीआई में सवाल नहीं पूछे जाते। केवल रिकॉर्ड या दस्तावेज मांगे जाते हैं। अगर आप “क्यों” या “कैसे” लिखेंगे, तो विभाग जवाब देने से बच सकता है।
आवेदन लिखते समय ये नियम अपनाएं:
- छोटे और साफ वाक्य लिखें
- हर जानकारी अलग लाइन में लिखें
- सिर्फ दस्तावेज या रिकॉर्ड मांगें
- तारीख, एफआईआर नंबर और थाना जरूर लिखें
- “प्रमाणित प्रति उपलब्ध कराएं” शब्दों का प्रयोग करें
लिखने का सही तरीका:
- एफआईआर संख्या ___ की प्रमाणित प्रति उपलब्ध कराएं
- इस मामले में की गई कार्रवाई की रिपोर्ट की प्रति दें
- जांच की वर्तमान स्थिति की जानकारी रिकॉर्ड के अनुसार दें
- जांच अधिकारी का नाम और पद बताएं
अब सही विभाग चुनना भी बहुत जरूरी है। गलत विभाग चुनने पर आपका आवेदन इधर-उधर ट्रांसफर हो सकता है, जिससे समय बर्बाद होता है।
सही विभाग चुनने के आसान नियम:
- थाना या एफआईआर से जुड़ी जानकारी → संबंधित जिला पुलिस / एसपी कार्यालय
- केस जांच या कार्रवाई → संबंधित पुलिस स्टेशन
- भर्ती या सेवा संबंधी मामला → पुलिस मुख्यालय
- सामान्य प्रशासनिक मामला → गृह विभाग
सही विभाग चुनने से जवाब जल्दी मिलता है।
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5. समय पर जवाब न मिले या जानकारी अधूरी हो तो प्रथम अपील कैसे करें
कानून के अनुसार, पुलिस विभाग को 30 दिनों के अंदर आरटीआई का जवाब देना जरूरी है। अगर 30 दिन तक कोई जवाब नहीं आता, या अधूरी जानकारी मिलती है, या आवेदन को गलत कारण से मना कर दिया जाता है, तो आप प्रथम अपील कर सकते हैं।
प्रथम अपील आपका अधिकार है। इसमें आपका मामला वरिष्ठ अधिकारी के पास जाता है। अधिकतर मामलों में इसी चरण पर सही जानकारी मिल जाती है, क्योंकि विभाग पर जवाब देने का दबाव बढ़ जाता है।
प्रथम अपील कब करें:
- 30 दिन तक कोई जवाब न मिले
- अधूरी जानकारी मिले
- गलत या बहाना बनाकर मना कर दिया जाए
- मांगे गए दस्तावेज न दिए जाएं
प्रथम अपील करने का तरीका:
- उसी आरटीआई पोर्टल पर लॉगिन करें
- “Submit First Appeal” विकल्प चुनें
- अपना आरटीआई रजिस्ट्रेशन नंबर डालें
- समस्या साफ शब्दों में लिखें
- अपील जमा करें
अपील में यह जरूर लिखें कि आप सूचना का अधिकार अधिनियम की धारा 19(1) के तहत अपील कर रहे हैं। इससे आपकी अपील मजबूत हो जाती है।
अपील के बाद वरिष्ठ अधिकारी को लगभग 30 से 45 दिनों में निर्णय देना होता है।
6. जल्दी और सही जानकारी पाने के आसान उपाय और आम गलतियां
बहुत लोग आरटीआई तो लगा देते हैं, लेकिन छोटी-छोटी गलतियों के कारण उन्हें सही जानकारी नहीं मिल पाती। अगर आप कुछ सरल बातों का ध्यान रखें, तो जल्दी और पूरा जवाब मिलने की संभावना बढ़ जाती है।
हमेशा याद रखें कि आरटीआई का उद्देश्य साफ और सीमित जानकारी लेना है। ज्यादा लंबा या उलझा हुआ आवेदन विभाग को समझने में कठिनाई देता है।
जल्दी सफलता के लिए ये उपाय अपनाएं:
- एक आवेदन में एक ही विषय रखें
- 4 या 5 बिंदु से ज्यादा न लिखें
- तारीख और नंबर साफ लिखें
- सिर्फ जरूरी दस्तावेज मांगें
- आवेदन की रसीद और नंबर संभालकर रखें
- समय-समय पर स्टेटस जांचते रहें
इन गलतियों से बचें:
- भावनात्मक या गुस्से वाली भाषा लिखना
- “क्यों”, “कैसे” जैसे सवाल पूछना
- बहुत लंबा पैराग्राफ लिखना
- गलत विभाग चुनना
- कई मामलों को एक ही आवेदन में डाल देना
सही तरीके से आरटीआई लगाने पर विभाग को कानूनी रूप से जवाब देना पड़ता है। इससे आपको लिखित और पक्की जानकारी मिलती है, जो आगे शिकायत या कानूनी कार्रवाई में काम आती है।
1. बिहार पुलिस में ऑनलाइन आरटीआई कहां से लगाएं?
आप https://rtionline.gov.in पोर्टल से ऑनलाइन आरटीआई लगा सकते हैं। इसी वेबसाइट पर बिहार राज्य और संबंधित पुलिस विभाग चुनकर आवेदन जमा किया जाता है।
2. ऑनलाइन आरटीआई लगाने की फीस कितनी होती है?
सामान्य आवेदक के लिए ₹10 शुल्क देना होता है। भुगतान यूपीआई, डेबिट कार्ड, नेट बैंकिंग या क्रेडिट कार्ड से किया जा सकता है। बीपीएल श्रेणी वालों के लिए शुल्क नहीं लगता।
3. क्या ऑनलाइन आरटीआई के लिए कोई दस्तावेज जमा करना जरूरी है?
नहीं। सामान्य आवेदक को कोई दस्तावेज अपलोड करने की जरूरत नहीं होती। केवल नाम, पता और मांगी गई जानकारी का विवरण भरना होता है।
4. बिहार पुलिस से कौन-कौन सी जानकारी आरटीआई से ली जा सकती है?
आप एफआईआर की कॉपी, केस की स्थिति, जांच रिपोर्ट, कार्रवाई विवरण, जांच अधिकारी का नाम, चार्जशीट की जानकारी और अन्य आधिकारिक रिकॉर्ड मांग सकते हैं।
5. आरटीआई का जवाब कितने दिनों में मिलता है?
कानून के अनुसार विभाग को 30 दिनों के अंदर जवाब देना अनिवार्य है। यदि समय पर जवाब नहीं मिलता, तो आप प्रथम अपील कर सकते हैं।
6. अगर पुलिस जानकारी देने से मना कर दे तो क्या करें?
ऐसी स्थिति में आप उसी पोर्टल से प्रथम अपील कर सकते हैं। आपकी अपील वरिष्ठ अधिकारी के पास जाएगी और वह मामले की दोबारा जांच करेगा।
7. क्या आरटीआई में सवाल पूछ सकते हैं?
नहीं। आरटीआई में “क्यों” या “कैसे” जैसे सवाल नहीं पूछे जाते। केवल दस्तावेज, रिकॉर्ड या रिपोर्ट की प्रतियां मांगी जाती हैं।
8. क्या मोबाइल से भी आरटीआई आवेदन किया जा सकता है?
हां। आप मोबाइल, लैपटॉप या कंप्यूटर किसी से भी ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। प्रक्रिया बिल्कुल समान रहती है।












































