ग्राम पंचायत / ग्राम प्रधान के खिलाफ RTI कैसे लगाएं?
ग्राम पंचायत या ग्राम प्रधान से जुड़ी समस्याएँ ज़्यादातर गाँवों में एक जैसी होती हैं —
काम कागज़ों में पूरा दिखा दिया गया, लेकिन ज़मीन पर अधूरा है।
भुगतान हो गया, लेकिन लाभार्थी को पैसा नहीं मिला।
रिकॉर्ड माँगने पर कहा जाता है “फाइल नहीं है” या “बाद में आना”।
ऐसी स्थिति में RTI (सूचना का अधिकार) ही एक ऐसा कानूनी माध्यम है, जिससे आप लिखित सरकारी रिकॉर्ड मंगा सकते हैं और पंचायत को जवाब देने के लिए बाध्य कर सकते हैं।
अब अनुमान नहीं, पुख़्ता जानकारी पाइए।
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सबसे पहले यह समझिए: RTI किसके खिलाफ नहीं, किसके पास लगती है
यह बहुत ज़रूरी बात है।
RTI ग्राम प्रधान के नाम पर नहीं, बल्कि ग्राम पंचायत के Public Information Officer (PIO) के पास लगाई जाती है।
ग्राम प्रधान व्यक्ति होता है, लेकिन RTI हमेशा पद और रिकॉर्ड रखने वाले कार्यालय को जाती है।
इसलिए RTI हमेशा ग्राम पंचायत के रिकॉर्ड से जुड़ी होगी।
आमतौर पर ग्राम पंचायत का PIO यह होता है:
- पंचायत सचिव
- ग्राम विकास अधिकारी (VDO)
- पंचायत विकास अधिकारी (PDO)
अगर आपको नाम नहीं पता, तो केवल यह लिखना पर्याप्त है:
“Public Information Officer, Gram Panchayat ______”
RTI लगाने से पहले यह स्पष्ट कर लें (बहुत ज़रूरी)
RTI लगाने से पहले आपको खुद यह पता होना चाहिए कि आप क्या जानकारी चाहते हैं।
अधूरी सोच के साथ डाली गई RTI का जवाब अक्सर बेकार मिलता है।
RTI से पहले अपने मन में यह साफ करें:
- कौन-सा काम / योजना?
- किस साल या अवधि का रिकॉर्ड?
- किस पंचायत का?
- जानकारी रिकॉर्ड में होगी या नहीं?
RTI कभी भी आरोप साबित करने का औज़ार नहीं है।
RTI केवल रिकॉर्ड बाहर लाने का माध्यम है।
RTI आवेदन कैसे लिखें – पूरा format
RTI आवेदन साधारण सफ़ेद कागज़ पर लिखा जाता है।
कोई सरकारी फॉर्म अनिवार्य नहीं है।
नीचे पूरा format समझाया गया है — कहाँ क्या लिखना है, उसी क्रम में।
आवेदन का शीर्षक (सबसे ऊपर)
कागज़ के सबसे ऊपर, बीच में लिखें:
“सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के अंतर्गत सूचना हेतु आवेदन”
यह लाइन RTI की पहचान है।
इसके बिना आवेदन RTI नहीं माना जाएगा।
किसे संबोधित करना है (PIO का पता)
इसके नीचे बाईं ओर लिखें:
To,
The Public Information Officer (PIO),
Gram Panchayat __________
Block __________
District __________
State __________
अगर ब्लॉक या जिला नहीं पता, तब भी ग्राम पंचायत का नाम लिखना ज़रूरी है।
आवेदक की पहचान (एक छोटी लाइन)
अब एक साधारण लाइन लिखें:
मैं, __________ (अपना पूरा नाम), निवासी __________ (पूरा पता), सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के अंतर्गत निम्नलिखित जानकारी चाहता/चाहती हूँ।
यह लाइन यह साबित करती है कि आप वैध RTI आवेदक हैं।
मांगी गई जानकारी कैसे लिखें (RTI का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा)
यहीं 90% लोग गलती करते हैं।
RTI में जानकारी हमेशा बिंदुओं में (points में) लिखी जाती है।
हर बिंदु में एक ही प्रकार की जानकारी मांगी जाती है।
सही तरीका नीचे समझिए:
RTI में इस तरह लिखना चाहिए:
- ग्राम पंचायत __________ में वित्तीय वर्ष ______ से ______ के दौरान कराए गए सभी विकास कार्यों की सूची की प्रमाणित प्रति प्रदान की जाए।
- उपरोक्त विकास कार्यों हेतु स्वीकृत राशि, जारी की गई राशि एवं भुगतान की तिथि से संबंधित विवरण की प्रमाणित प्रति उपलब्ध कराई जाए।
- उपरोक्त कार्यों से संबंधित कार्यादेश (Work Order), मापन पुस्तिका (Measurement Book) एवं कार्य पूर्णता प्रमाण पत्र की प्रतिलिपि प्रदान की जाए।
- जिन कार्यों को पूर्ण दिखाया गया है, उनके भौतिक सत्यापन (Inspection) से संबंधित रिपोर्ट की प्रति उपलब्ध कराई जाए।
RTI में क्या बिल्कुल नहीं लिखना चाहिए
RTI में ये बातें कभी न लिखें:
- प्रधान ने घोटाला क्यों किया?
- कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
- दोषी कौन है?
- पैसे का दुरुपयोग हुआ या नहीं?
यह सवाल राय और आरोप माने जाते हैं।
RTI केवल मौजूद रिकॉर्ड के लिए होती है।
कितने प्रश्न लिखें? (बहुत practical बात)
एक RTI में आदर्श रूप से:
- 4 से 6 प्रश्न
- सभी एक ही विषय से जुड़े
- सभी रिकॉर्ड-आधारित
बहुत ज़्यादा प्रश्न लिखने पर अधिकारी “सूचना अत्यधिक है” कहकर जवाब टाल सकता है।
RTI शुल्क (Fee) कैसे और कितना?
अधिकांश राज्यों में RTI शुल्क ₹10 होता है।
Offline RTI में:
- ₹10 का Indian Postal Order (IPO) & Post Office Charge 50 to 200rs or more
- & Treasury Challan (राज्य अनुसार)
Online RTI में:
- Online payment gateway से भुगतान
यदि आवेदक BPL श्रेणी में है, तो शुल्क माफ होता है (BPL प्रमाण संलग्न करना होता है)।
RTI आवेदन का समापन कैसे करें
अंत में लिखें:
अतः आपसे निवेदन है कि मांगी गई सूचना RTI Act, 2005 की धारा 7(1) के अंतर्गत 30 दिनों की समय-सीमा में उपलब्ध कराई जाए।
धन्यवाद
आवेदक का नाम
पूरा पता
हस्ताक्षर
दिनांक
यह RTI का औपचारिक समापन होता है।
RTI कैसे जमा करें (Actual Submission)
RTI इन तरीकों से जमा की जा सकती है:
- ग्राम पंचायत कार्यालय में व्यक्तिगत रूप से (रसीद ज़रूर लें)
- Speed Post / Registered Post द्वारा
- राज्य की RTI Online वेबसाइट (जहाँ सुविधा उपलब्ध हो)
हमेशा यह सुनिश्चित करें कि:
- RTI की एक कॉपी आपके पास हो
- डाक रसीद / acknowledgement सुरक्षित हो
ग्राम पंचायत के लिए RTI Online कैसे करें?
सबसे पहले यह समझना बहुत ज़रूरी है कि ग्राम पंचायत के लिए RTI Online हर राज्य में और हर पंचायत में उपलब्ध नहीं होती।
बहुत से लोग सीधे RTI Online Portal पर जाकर आवेदन कर देते हैं, लेकिन बाद में पता चलता है कि पंचायत उस portal से जुड़ी ही नहीं थी।
इसलिए RTI Online करने से पहले state-wise availability समझना सबसे ज़रूरी कदम है।
RTI Online का मतलब यह नहीं है कि हर सरकारी कार्यालय online RTI स्वीकार करता है।
RTI Online केवल उन्हीं विभागों के लिए काम करता है जिन्हें सरकार ने portal से officially जोड़ा हो।
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RTI Online करने से पहले क्या जाँचें?
RTI Online डालने से पहले आपको यह सुनिश्चित करना चाहिए:
- आपका राज्य RTI Online Portal चलाता है या नहीं
- पंचायत विभाग उस portal पर listed है या नहीं
- ग्राम पंचायत सीधे portal पर दिख रही है या नहीं
अगर portal पर “Gram Panchayat” या “Panchayati Raj Department” का option नहीं दिखता, तो RTI Online प्रभावी नहीं होगी।
ग्राम पंचायत के लिए RTI Online करने की step-by-step प्रक्रिया
अगर आपके राज्य में पंचायत RTI Online से जुड़ी है, तो प्रक्रिया इस प्रकार होती है:
Step 1: राज्य के RTI Online Portal पर जाएँ
- अपने राज्य का official RTI Online portal खोलें
- “Apply RTI / Submit RTI Application” विकल्प चुनें
हर राज्य का portal अलग हो सकता है, लेकिन प्रक्रिया लगभग समान रहती है।
Step 2: Applicant Details भरें
RTI Online में सबसे पहले आपकी basic जानकारी मांगी जाती है:
- पूरा नाम
- मोबाइल नंबर
- ईमेल ID
- पूरा डाक पता
यह जानकारी इसलिए ज़रूरी है क्योंकि RTI का जवाब इन्हीं विवरणों पर भेजा जाता है।
Step 3: Public Authority / Department का चयन कैसे करें?
यह सबसे critical step है और यहीं सबसे ज़्यादा गलतियाँ होती हैं।
RTI Online में आपको निम्न में से सही option चुनना होता है:
- Panchayati Raj Department
- Rural Development Department
- Zila Panchayat / Janpad Panchayat (यदि ग्राम पंचायत listed न हो)
अगर ग्राम पंचायत direct option में नहीं दिख रही है, तो Janpad Panchayat या Panchayati Raj Department को चुनना ज्यादा सुरक्षित रहता है।
Step 4: RTI Text (Information Sought) कैसे लिखें?
RTI Online में एक box दिया जाता है जिसमें आपको पूरी RTI टाइप करनी होती है।
यहाँ भी वही नियम लागू होते हैं जो offline RTI में होते हैं।
RTI हमेशा:
- बिंदुओं में
- रिकॉर्ड आधारित
- स्पष्ट भाषा में
लिखी जानी चाहिए।
गलत या आरोपात्मक भाषा लिखने से RTI कमजोर हो जाती है।
Step 5: RTI Fee का भुगतान
RTI Online में शुल्क online ही देना होता है।
- Debit Card / UPI / Net Banking से भुगतान
भुगतान के बाद आपको एक RTI Registration Number मिलता है, जिसे सुरक्षित रखना बहुत ज़रूरी है।
Step 6: RTI Online के बाद क्या करें?
RTI Online submit करने के बाद:
- Application ID नोट करें
- Portal पर RTI Status समय-समय पर चेक करें
- 30 दिन की समय-सीमा गिनना शुरू करें
अगर 30 दिनों में जवाब नहीं आता, तो First Appeal का अधिकार बनता है।
RTI Online में आम समस्याएँ (Practical Reality)
- पंचायत portal से mapped नहीं होती
- RTI गलत विभाग को चली जाती है
- आवेदन “Transfer” में फँस जाता है
- जवाब “Record not available” कहकर टाल दिया जाता है
इसी वजह से कई मामलों में offline RTI ज्यादा effective साबित होती है।
ग्राम पंचायत RTI में कौन-सा विभाग / PIO जिम्मेदार होता है?
यह सवाल RTI का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है।
अगर RTI गलत विभाग या गलत PIO के पास चली गई, तो पूरा आवेदन बेकार हो सकता है।
RTI हमेशा उस अधिकारी के पास जाती है जिसके पास रिकॉर्ड रखने की कानूनी जिम्मेदारी होती है।
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क्या ग्राम प्रधान PIO होता है?
नहीं।
ग्राम प्रधान या सरपंच कभी भी PIO नहीं होता।
ग्राम प्रधान एक निर्वाचित प्रतिनिधि है, लेकिन RTI का जवाब देने की जिम्मेदारी प्रशासनिक अधिकारी की होती है।
RTI हमेशा पद (office) को जाती है, व्यक्ति को नहीं।
ग्राम पंचायत का वास्तविक PIO कौन होता है?
अलग-अलग राज्यों में नाम बदल सकता है, लेकिन सामान्यतः ग्राम पंचायत का PIO होता है:
- पंचायत सचिव
- ग्राम विकास अधिकारी (VDO)
- पंचायत विकास अधिकारी (PDO)
कई राज्यों में यही अधिकारी ग्राम पंचायत के सभी रिकॉर्ड का custodian होता है।
ग्राम पंचायत से जुड़े अलग-अलग मामलों में PIO कैसे बदलता है?
यह बहुत practical बात है।
अगर RTI का विषय बदलता है, तो जिम्मेदार विभाग भी बदल सकता है:
- विकास कार्य / फंड → Panchayati Raj Department
- मनरेगा कार्य → Program Officer (MGNREGA)
- आवास योजना → Rural Development Department
- सफाई / स्वच्छता → Panchayat / Block Office
गलत विभाग चुनने पर RTI transfer होती रहती है और समय निकल जाता है।
सही PIO पहचानने का आसान तरीका
RTI डालने से पहले खुद से ये सवाल पूछें:
- यह रिकॉर्ड किस कार्यालय में रखा जाता है?
- भुगतान किस स्तर से हुआ?
- कार्य की स्वीकृति किसने दी?
जिस कार्यालय के पास यह रिकॉर्ड है, वही RTI का सही PIO होगा।
अगर PIO का नाम नहीं पता हो तो क्या करें?
PIO का नाम न पता होना कोई समस्या नहीं है।
RTI में केवल यह लिखना पूरी तरह वैध है:
Public Information Officer,
Gram Panchayat ______,
Block ______, District ______
कानून के अनुसार RTI सही PIO तक पहुँचाना विभाग की जिम्मेदारी होती है।
गलत PIO को RTI जाने पर क्या होता है?
- RTI transfer हो जाती है
- समय बर्बाद होता है
- कभी-कभी जवाब अधूरा मिलता है
- First Appeal में परेशानी आती है
इसीलिए RTI डालते समय PIO की पहचान सबसे अहम होती है।
ग्राम पंचायत RTI से क्या जानकारी मांगी जा सकती है?
RTI का सबसे बड़ा फायदा यह है कि ग्राम पंचायत से जुड़ा कोई भी सरकारी रिकॉर्ड छुपाया नहीं जा सकता — बशर्ते आप सही जानकारी माँगें।
गाँवों में ज़्यादातर समस्याएँ इसलिए बनी रहती हैं क्योंकि लोग रिकॉर्ड नहीं मांगते, सिर्फ शिकायत करते हैं।
RTI शिकायत नहीं है, बल्कि दस्तावेज़ देखने का अधिकार है।
नीचे ग्राम पंचायत से जुड़ी सबसे आम और सबसे ज़्यादा searched समस्याएँ दी जा रही हैं, जिन पर RTI लगाई जाती है।
ग्राम पंचायत फंड से जुड़ी जानकारी (सबसे ज़्यादा RTI यहीं लगती है)
लगभग हर गाँव में यह सवाल होता है कि
“पैसा आया था, लेकिन काम दिखाई क्यों नहीं दे रहा?”
RTI में आप ये जानकारी मांग सकते हैं:
- ग्राम पंचायत को वर्ष-वार प्राप्त कुल फंड
- किस योजना के तहत कितना पैसा मिला
- पैसा किस तारीख को जारी हुआ
- किस मद में खर्च दिखाया गया
👉 यह जानकारी फंड गबन और कागज़ी काम पकड़ने का आधार बनती है।
विकास कार्यों से जुड़ी जानकारी (सड़क, नाली, भवन, लाइट)
गाँव में सबसे ज़्यादा शिकायतें इन्हीं कामों को लेकर होती हैं।
RTI में आप पूछ सकते हैं:
- किन-किन विकास कार्यों को स्वीकृति दी गई
- कार्यादेश (Work Order) की प्रति
- ठेकेदार / एजेंसी का नाम
- कार्य पूर्णता रिपोर्ट (Completion Report)
- निरीक्षण (Inspection) रिपोर्ट
अगर कागज़ों में काम पूरा और ज़मीन पर अधूरा है, तो यही RTI सबसे मज़बूत सबूत बनती है।
मनरेगा (MGNREGA) से जुड़ी जानकारी
मनरेगा गाँवों में RTI का सबसे बड़ा क्षेत्र है।
RTI में यह जानकारी मांगी जा सकती है:
- जॉब कार्ड धारकों की सूची
- कितने दिन का रोजगार दिया गया
- मजदूरी भुगतान की तारीख
- मस्टर रोल (Muster Roll) की प्रति
- कार्य स्थल की निरीक्षण रिपोर्ट
मनरेगा RTI से फर्जी नाम, फर्जी भुगतान और बिचौलिया सिस्टम सामने आता है।
आवास योजनाएँ (PMAY / ग्रामीण आवास)
गाँवों में आम शिकायत रहती है कि
“नाम लिस्ट में है, लेकिन पैसा नहीं मिला।”
RTI में पूछें:
- लाभार्थियों की सूची
- किसे कितनी किस्त दी गई
- भुगतान की तारीख
- अपात्र लोगों को लाभ क्यों मिला
यह RTI सीधे पात्र-अपात्र का फर्क सामने लाती है।
सफाई, पानी और स्वच्छता से जुड़ी जानकारी
गाँव में सफाई और पानी की समस्या बहुत आम है।
RTI में मांगी जा सकती है:
- सफाई कार्य के लिए स्वीकृत राशि
- कचरा प्रबंधन योजना
- हैंडपंप / नल योजना की स्थिति
- मरम्मत और रख-रखाव का रिकॉर्ड
यह RTI पंचायत की ज़मीनी ज़िम्मेदारी तय करती है।
पंचायत कर्मचारियों और पदाधिकारियों से जुड़ी जानकारी
अक्सर सवाल उठता है कि
“कर्मचारी आते नहीं, फिर भी वेतन मिल रहा है।”
RTI में पूछें:
- पंचायत कर्मचारियों की उपस्थिति रजिस्टर
- वेतन भुगतान विवरण
- नियुक्ति आदेश
- कार्य आवंटन विवरण
यह RTI लापरवाही और फर्जी उपस्थिति को उजागर करती है।
पंचायत बैठकों और निर्णयों का रिकॉर्ड
बहुत से निर्णय पंचायत बैठकों में लिए जाते हैं, लेकिन जनता को जानकारी नहीं दी जाती।
RTI में मांगी जा सकती है:
- ग्राम सभा / पंचायत बैठक की कार्यवाही
- पास किए गए प्रस्ताव
- उपस्थिति रजिस्टर
- निर्णय लागू करने की रिपोर्ट
यह RTI निर्णयों की पारदर्शिता बढ़ाती है।
राज्य-विशेष ग्राम पंचायत RTI (All-India Coverage Table)
नीचे लगभग सभी राज्यों के लिए यह बताया गया है कि ग्राम पंचायत से जुड़े मामलों में RTI आमतौर पर किस विभाग / स्तर पर जाती है।
(SEO के लिए state keywords भी naturally cover हो रहे हैं)
| राज्य | ग्राम पंचायत से जुड़े RTI के लिए जिम्मेदार विभाग / स्तर |
|---|---|
| उत्तर प्रदेश (UP) | ग्राम पंचायत सचिव / पंचायत राज विभाग |
| बिहार | पंचायत सचिव / पंचायती राज विभाग |
| राजस्थान | ग्राम विकास अधिकारी (VDO) / पंचायती राज |
| मध्य प्रदेश | पंचायत सचिव / जनपद पंचायत |
| छत्तीसगढ़ | ग्राम पंचायत सचिव / पंचायत एवं ग्रामीण विकास |
| महाराष्ट्र | ग्राम सेवक / ग्राम विकास अधिकारी |
| गुजरात | तलाठी / पंचायत विभाग |
| हरियाणा | पंचायत सचिव / विकास एवं पंचायत विभाग |
| पंजाब | ग्राम पंचायत सचिव |
| उत्तराखंड | ग्राम पंचायत सचिव / विकास खंड |
| हिमाचल प्रदेश | पंचायत सचिव |
| झारखंड | पंचायत सेवक / ग्रामीण विकास |
| ओडिशा | पंचायत कार्यपालक अधिकारी |
| पश्चिम बंगाल | ग्राम पंचायत सचिव |
| तमिलनाडु | पंचायत क्लर्क / ग्रामीण विकास |
| कर्नाटक | पंचायत विकास अधिकारी (PDO) |
| तेलंगाना | पंचायत सचिव |
| आंध्र प्रदेश | पंचायत सचिव |
| केरल | ग्राम पंचायत सचिव |
| असम | पंचायत सचिव |
| मेघालय | ग्राम पंचायत सचिव |
👉 महत्वपूर्ण:
राज्य बदलने पर पदनाम बदल सकता है, लेकिन RTI हमेशा रिकॉर्ड रखने वाले अधिकारी के पास जाती है।
राज्य-विशेष RTI डालते समय आम गलतियाँ
- सीधे ग्राम प्रधान को RTI भेज देना
- राज्य का विभाग समझे बिना RTI Online डाल देना
- जिला / ब्लॉक स्तर को ignore करना
- योजना राज्य में लागू है या नहीं, यह न देखना
इन गलतियों से RTI कमजोर हो जाती है।
गाँव स्तर पर RTI सबसे ज़्यादा किन मुद्दों पर सफल होती है?
SEO + Practical दोनों के हिसाब से ये Top RTI Issues हैं:
- पंचायत फंड डिटेल
- अधूरे विकास कार्य
- मनरेगा मजदूरी
- आवास योजना भुगतान
- फर्जी लाभार्थी
- पंचायत कर्मचारियों की लापरवाही
यही issues सबसे ज़्यादा search भी होते हैं और ground पर असर भी डालते हैं।











































