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राज्य सूचना आयोग में शिकायत कब और किन मामलों में करनी चाहिए
अधिकांश लोग सीधे शिकायत दर्ज कर देते हैं, जबकि कानून के अनुसार हर मामला आयोग तक नहीं जाता।
पहले यह समझना जरूरी है कि आपकी समस्या “सूचना न मिलने” से जुड़ी है या “गलत सूचना” से।
सही स्थिति पहचानना ही आपकी शिकायत की सफलता तय करता है।
यदि आपने RTI आवेदन डाला और:
- 30 दिन में कोई जवाब नहीं मिला
- अधूरी या गलत जानकारी दी गई
- जानबूझकर सूचना रोकी गई
- अत्यधिक या गलत शुल्क मांगा गया
- PIO ने आवेदन स्वीकार ही नहीं किया
तो यह स्पष्ट रूप से शिकायत योग्य मामला है।
ध्यान रखें कि कई मामलों में पहले “प्रथम अपील” करना अनिवार्य होता है।
सीधे आयोग जाने पर शिकायत तकनीकी आधार पर खारिज हो सकती है।
इसलिए पहले अपील, फिर आयोग – यही सही कानूनी क्रम है।
संक्षेप में, आयोग अंतिम उपाय है, पहला कदम नहीं।
जब विभाग आपकी बात नहीं सुनता, तभी आयोग आपकी आवाज बनता है।
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राज्य सूचना आयोग में शिकायत करने की Step-by-Step प्रक्रिया (ऑनलाइन व ऑफलाइन)
बहुत से लोग सोचते हैं कि आयोग में जाना जटिल प्रक्रिया है।
वास्तव में, यदि चरणबद्ध तरीके से करें तो यह सरल और व्यवस्थित प्रक्रिया है।
आप इसे घर बैठे ऑनलाइन या डाक/स्वयं जाकर ऑफलाइन दोनों तरह से कर सकते हैं।
सबसे पहले अपनी पूरी फाइल तैयार करें।
अधूरी जानकारी या दस्तावेज़ों की कमी के कारण अधिकतर शिकायतें वापस हो जाती हैं।
तैयारी सही होगी तो सुनवाई तेज़ होगी।
स्टेप-बाय-स्टेप प्रक्रिया:
- RTI आवेदन की कॉपी रखें
- डाक रसीद या ऑनलाइन सबमिशन प्रमाण रखें
- विभाग का जवाब (यदि मिला हो) संलग्न करें
- प्रथम अपील और उसका परिणाम जोड़ें
- अब शिकायत पत्र तैयार करें
ऑनलाइन प्रक्रिया में संबंधित राज्य सूचना आयोग की वेबसाइट पर लॉगिन कर शिकायत फॉर्म भरना होता है।
फॉर्म में केस का विवरण, तिथियाँ और मांगी गई सूचना स्पष्ट लिखनी होती है।
स्कैन दस्तावेज़ अपलोड करके सबमिट करें और रसीद सुरक्षित रखें।
ऑफलाइन प्रक्रिया में प्रिंटेड आवेदन, दस्तावेज़ और पहचान पत्र की कॉपी के साथ रजिस्टर्ड पोस्ट से भेजें।
कई राज्यों में स्वयं जाकर जमा भी किया जा सकता है।
हमेशा स्पीड पोस्ट/रजिस्टर्ड पोस्ट का उपयोग करें ताकि ट्रैकिंग प्रमाण रहे।
सरल भाषा में तथ्य लिखें।
भावनात्मक या आरोपात्मक भाषा से बचें।
आयोग केवल दस्तावेज़ और साक्ष्य के आधार पर निर्णय देता है।
इस चरण में सटीकता आपकी सबसे बड़ी ताकत है।
शिकायत के लिए जरूरी दस्तावेज, फॉर्मेट और आवेदन कैसे तैयार करें
राज्य सूचना आयोग में सबसे ज्यादा शिकायतें दस्तावेज़ी कमी के कारण खारिज होती हैं।
लोग केवल आवेदन लिखते हैं, पर प्रमाण संलग्न नहीं करते।
आयोग “बिना सबूत” मामलों को स्वीकार नहीं करता।
आपका आवेदन स्पष्ट, तथ्यात्मक और क्रमबद्ध होना चाहिए।
हर तारीख, हर कार्रवाई और हर दस्तावेज़ का उल्लेख होना चाहिए।
इसी से केस मजबूत बनता है।
जरूरी दस्तावेज़:
- मूल RTI आवेदन की कॉपी
- डाक/ऑनलाइन सबमिशन रसीद
- PIO का उत्तर (यदि मिला हो)
- प्रथम अपील की कॉपी
- अपील का निर्णय या जवाब
- पहचान प्रमाण
आवेदन का सही फॉर्मेट:
- विषय (Subject): सूचना न देने के संबंध में शिकायत
- तथ्य संक्षेप में लिखें
- कब आवेदन दिया, कब जवाब नहीं मिला – तारीख सहित
- किस सूचना की मांग की थी
- आयोग से क्या राहत चाहते हैं
भाषा सरल और कानूनी रूप से स्पष्ट होनी चाहिए।
लंबी कहानी या अनावश्यक विवरण देने से बचें।
केवल तथ्य और प्रमाण लिखें।
आयोग को यह समझ आना चाहिए कि आपने हर वैधानिक कदम पहले ही पूरा कर लिया है।
तभी वे विभाग के खिलाफ कार्रवाई शुरू करते हैं।
सही ड्राफ्टिंग से सुनवाई जल्दी तय होती है और सफलता की संभावना बढ़ती है।
इस प्रकार, सही कारण पहचानना, सही प्रक्रिया अपनाना और पूर्ण दस्तावेज़ लगाना – यही मजबूत शिकायत की तीन आधारशिलाएं हैं।
यदि यह तीनों ठीक हैं, तो आयोग से न्याय मिलना लगभग निश्चित हो जाता है।
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शिकायत के बाद क्या होता है: सुनवाई, समयसीमा और निर्णय प्रक्रिया
अधिकांश आवेदक शिकायत भेजने के बाद इंतज़ार करते रहते हैं और समझ नहीं पाते कि आगे क्या होगा।
वास्तव में आयोग की प्रक्रिया एक अर्ध-न्यायिक (quasi-judicial) व्यवस्था होती है, जहाँ हर केस रिकॉर्ड के आधार पर तय होता है।
यदि आपका आवेदन सही है, तो आपको विधिवत सुनवाई का अवसर मिलता है।
शिकायत जमा होने के बाद आयोग पहले प्रारंभिक जांच करता है।
वे देखते हैं कि मामला स्वीकार्य है या नहीं और दस्तावेज़ पूरे हैं या नहीं।
यदि कोई कमी होती है, तो नोटिस भेजकर सुधार का मौका दिया जाता है।
सामान्य प्रक्रिया इस प्रकार चलती है:
- शिकायत पंजीकरण नंबर जारी होता है
- विभाग/PIO को नोटिस भेजा जाता है
- सुनवाई की तारीख तय होती है
- दोनों पक्षों से लिखित/मौखिक पक्ष सुना जाता है
- अंतिम आदेश पारित होता है
सुनवाई ऑनलाइन वीडियो कॉल, फोन या व्यक्तिगत उपस्थिति में हो सकती है।
आपको केवल तथ्य और दस्तावेज़ के आधार पर अपना पक्ष रखना होता है।
भावनात्मक तर्क या आरोप आयोग में प्रभावी नहीं होते।
समयसीमा राज्य के अनुसार बदल सकती है, लेकिन आमतौर पर 2 से 6 महीने में निर्णय आता है।
यदि मामला गंभीर हो या सूचना सार्वजनिक हित में हो, तो प्रक्रिया तेज भी हो सकती है।
नियमित रूप से केस स्टेटस ट्रैक करना आवश्यक है।
आदेश में आयोग विभाग को सूचना देने, जुर्माना लगाने या अनुशासनात्मक कार्रवाई का निर्देश दे सकता है।
यही चरण आपकी शिकायत का वास्तविक परिणाम तय करता है।
आम गलतियाँ जिनसे शिकायत खारिज हो सकती है और उनसे कैसे बचें
बहुत से मजबूत केस भी छोटी तकनीकी गलतियों की वजह से खारिज हो जाते हैं।
लोग सोचते हैं कि “सच मेरे साथ है”, लेकिन आयोग केवल नियम और प्रक्रिया देखता है।
इसलिए सावधानी ही सफलता की कुंजी है।
सबसे सामान्य गलती है सीधे आयोग जाना।
यदि प्रथम अपील नहीं की गई, तो शिकायत अस्वीकार हो सकती है।
कानूनी क्रम का पालन अनिवार्य है।
इन गलतियों से हमेशा बचें:
- अपूर्ण दस्तावेज़ लगाना
- तारीखों का स्पष्ट उल्लेख न करना
- भावनात्मक भाषा या आरोप लगाना
- गलत प्राधिकरण को शिकायत भेजना
- अस्पष्ट या बहुत लंबा आवेदन लिखना
- प्रमाण के बिना आरोप लगाना
कई लोग सिर्फ “सूचना नहीं मिली” लिख देते हैं।
लेकिन यह पर्याप्त नहीं है; आपको सबूत देना होता है कि कब आवेदन किया और क्या जवाब मिला।
बिना साक्ष्य के आयोग कार्रवाई नहीं करता।
भाषा भी महत्वपूर्ण है।
सरल, स्पष्ट और कानूनी शैली अपनाएं।
संक्षिप्त तथ्यों से केस मजबूत बनता है।
सही तरीका यह है कि हर कदम का रिकॉर्ड रखें।
डाक रसीद, ईमेल, स्क्रीनशॉट – सब सहेजकर रखें।
यही दस्तावेज़ आपकी जीत का आधार बनते हैं।
पेशेवर सहायता से राज्य सूचना आयोग शिकायत तेज़ और सही तरीके से कैसे दाखिल करें
कई बार आम नागरिक के लिए पूरा ड्राफ्ट, फॉर्मेट और कानूनी प्रक्रिया समझना मुश्किल हो जाता है।
गलत ड्राफ्टिंग के कारण महीनों की मेहनत बेकार हो सकती है।
यहीं पेशेवर मार्गदर्शन आपकी सफलता दर बढ़ा देता है।
विशेषज्ञ सहायता लेने से:
- सही सेक्शन और कानूनी आधार शामिल होते हैं
- आवेदन प्रोफेशनल तरीके से ड्राफ्ट होता है
- सभी दस्तावेज़ व्यवस्थित किए जाते हैं
- तकनीकी त्रुटियों से बचाव होता है
- सुनवाई की तैयारी कराई जाती है
एक व्यवस्थित, प्रमाण आधारित और कानून के अनुरूप शिकायत आयोग पर सकारात्मक प्रभाव डालती है।
इससे केस तेजी से स्वीकार होता है और विभाग पर जवाबदेही बढ़ती है।
अनुभवी सहायता से समय और मेहनत दोनों बचते हैं।
यदि आप चाहते हैं कि आपकी शिकायत बिना गलती के, पूरी कानूनी मजबूती के साथ दाखिल हो, तो विशेषज्ञ सहयोग लेना समझदारी भरा निर्णय है।
सही मार्गदर्शन से सूचना मिलने की संभावना कई गुना बढ़ जाती है।
अंततः लक्ष्य केवल शिकायत दर्ज करना नहीं, बल्कि परिणाम प्राप्त करना है।
इस प्रकार, सुनवाई प्रक्रिया समझना, सामान्य गलतियों से बचना और सही सहायता लेना – यही सफल राज्य सूचना आयोग शिकायत की अंतिम तीन कुंजियां हैं।
यदि ये तीनों सही हैं, तो आपको जानकारी मिलने से कोई नहीं रोक सकता।
. राज्य सूचना आयोग में शिकायत कब करनी चाहिए?
जब 30 दिनों के भीतर RTI का जवाब न मिले, अधूरी/गलत सूचना दी जाए, अत्यधिक शुल्क मांगा जाए या PIO आवेदन स्वीकार न करे, तब राज्य सूचना आयोग में शिकायत की जा सकती है।
क्या राज्य सूचना आयोग में जाने से पहले प्रथम अपील करना जरूरी है?
हाँ, अधिकांश मामलों में पहले प्रथम अपील करना अनिवार्य है। बिना प्रथम अपील के सीधे आयोग जाने पर शिकायत तकनीकी आधार पर खारिज हो सकती है।
राज्य सूचना आयोग में शिकायत ऑनलाइन कैसे करें?
राज्य सूचना आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर शिकायत फॉर्म भरें, RTI आवेदन व अपील की कॉपी अपलोड करें, विवरण दर्ज करें और सबमिट कर रसीद सुरक्षित रखें।
शिकायत के साथ कौन-कौन से दस्तावेज़ लगाना अनिवार्य है?
आवश्यक दस्तावेज़ हैं:
- RTI आवेदन की कॉपी
- डाक/ऑनलाइन रसीद
- PIO का जवाब
- प्रथम अपील की कॉपी
- अपील का निर्णय
- पहचान प्रमाण
बिना दस्तावेज़ शिकायत स्वीकार नहीं होती।
. राज्य सूचना आयोग में शिकायत का फैसला कितने समय में आता है?
आमतौर पर 2 से 6 महीनों में सुनवाई और आदेश मिल जाता है। केस की गंभीरता और राज्य के लंबित मामलों के अनुसार समय बदल सकता है।
क्या आयोग PIO या विभाग पर जुर्माना लगा सकता है?
हाँ, यदि जानबूझकर सूचना रोकी गई हो या नियमों का उल्लंघन हुआ हो, तो आयोग PIO पर प्रतिदिन के हिसाब से जुर्माना या अनुशासनात्मक कार्रवाई का आदेश दे सकता है।
शिकायत खारिज होने से कैसे बचें?
इन बातों का ध्यान रखें:
- पहले प्रथम अपील करें
- सभी दस्तावेज़ संलग्न करें
- तारीखें स्पष्ट लिखें
- सही आयोग में आवेदन करें
- सरल और तथ्यात्मक भाषा उपयोग करें
सही प्रक्रिया अपनाने से सफलता की संभावना बहुत बढ़ जाती है।
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